Friday, October 4, 2019

हाइकू



कुसुम खिले
उपवन महके
मन चहके।

परागकण
ले डोलें तितलियां
पुष्प पुष्प पे।

प्रेम टपके
आनंदित हो मन
खिले पुष्प सा।

खेल खेलता
नटखट बालक
लगे पुष्प सा।

घर आँगन
सुगंध भर जाए
सावन आये।

गीली घरती
पीले टेसू सी खिल 
हर्ष मनाए।

जीव पुष्प सा
तब बनता जब
आत्मा खुशबू।

नन्ही कलियाँ
जल्दी जल्दी बढ़ती
कांधे चढ़ती।

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